क्या आप जानते हैं कि पांच तत्वों से बना हमारा शरीर नाशवान है, जबकि इसमें बसी आत्मा अविनाशी है? हमारी अविनाशी आत्मा इस नाशवान शरीर मे कैसे फंसी?

सवाल बड़ा जटिल है परतुं नामुमकिन नहीं। इसको समझने के लिए इतनी ही तेज तर्रार बुद्धि व विवेक की जरूरत पडेगी। क्योंकि ये कल्पना से भी परे की स्थिति है। पहले ये विचार करो ये 5 तत्व कैसे बने। यदि मन होगा तो कल्पना होगी क्योंकि कल्पना के बिना तो कोई खोज नहीं हो सकती। अब ये विचार करो आखिर ये मन कहां से कैसे बना। ये निराकार वाली स्थिति हो गयी अब। क्योंकि बिना किसी पावर के तो मन कल्पना नहीं कर सकता। ये प्रमाण है की मन ओर तत्व विनाशी/मृत है। फिर इनको पावर किसने क्यों कैसे दि। अब यहां कुछ नहीं है क्योंकि हमने पावर अलग कर दि हैं। हम आपके सवाल से उल्टा चलकर हल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सत्य को समझना बुद्धि से नहीं विवेक से समझना होगा। अब केवल पूर्ण पावर का ही क्षेत्र है जिसका कोई ना आदि हैं ना अतं है। इस अवस्था को ही हम पूर्ण परमात्मा कहते हैं। क्यो कहते हैं ओर क्युं माने इसका पुख्ता कारण है। यही अवस्था जिवित सुरति/चाह हैं अर्थात जिवित पूर्ण उर्जा। अब आप पुरी बुद्धि व विवेक लगाकर समझे सत्य ओर असत्य को।ओर अलग अलग करते जाईये सब आसानी से समझ आ जाएगा। क्योंकि इसका प्रमाण ये सब जीव व सृष्टि है। आईये अब आगे बढते हैं। सब ओर परमात्मा ही परमात्मा है ओर कुछ नहीं है यानी ना अधेंरा ना प्रकाश एकदम शांत। अब कोई सुरति/इच्छा करती है। अर्थात पावर में हलचल होती है। ये शुरूवाती इच्छा ही मन बनता कैसे समझते रहिये। यदि इच्छा ना होती तो हलचल नहीं होती ओर ये हलचल ही मन है। ओर इच्छा को पता नहीं है ये हलचल क्या है। क्योंकि उसके पास सोचने समझने के लिए कुछ भी पास नहीं है। इसलिए ये इच्छा/सुरति ना समझने के कारण मन को ही जीवित सुरति यानी स्वयं मान बैठी। कि ये मै ही हू मेरे शिवाय ओर कोई नहीं। जबकी यहां दो चीजें हो गयी है एक सुरती व दुसरी हलचल या मन। या ये समझो समय का जन्म। यही से भारी भुलभलैया शुरू होती है। क्योंकि सुरति ही भुलवश अपने को मन मान रही है। अब 2 धाराये उत्पन हो गयी एक पोजिटिव जो सुरति है ओर दुसरी मन जो नेगेटिव यानी हलचल है। अब आगे रचना के लिए दो जरुरी पावर प्रकट हो चुकी है। दोनों में विस्फोट होता है ओर सब आकाशगंगा सुर्य तारे व सब ब्रह्मांड बनते हैं। अब मन निराकार रुप में व ये उत्पन ब्रम्हांड साकार रूप में प्रकट हो चुके हैं। इसी भ्रम की स्थिति को ब्रह्म कहते हैं। यही से 5 तत्व प्रकट हुए। अब लाखों करोड़ों सुर्य चन्द्र व असंख्य लोक प्रकट हो चुके हैं परतुं जीव अभी भी नहीं है। अब इन ब्रम्हांडों को पावर देने वाले बहुत सुर्य चन्द्र स्थापित हो चुके हैं। सब तत्व अपनी अपनी गति के अतिंम बिदुं पर जाकर स्थिर हो गये ओर कुछ गति कर रहे हैं जो आज भी है ओर रहेगें। ये बनना ओर खत्म होना ओर फिर बनना यही भ्रम व ब्रह्म है। अर्थात Light is god,, god is light. या Light was god,, Light is god. फिर धीरे धीरे सुर्य चन्द्र से उर्जा लेकर तत्व बनते बिगडते गये ओर जटिल प्रक्रिया से घास फुस का निर्माण होता गया। ओर सुक्ष्म शरीर का निर्माण हुआ जो कल्पना करने के लिए उपयुक्त था। अब जो जिवित मन था उसमें विराजमान हो गया। ओर बहुत बहुत शक्तिशाली हो गया क्योंकि उसको सोचने व कुछ करने की शक्ति मिल गयी। अर्थात हर चीज का निर्माण करने वाली सुक्षम शक्ति प्रकट हो गयी। इसे आप आदिशक्ति माया भी समझ सकते हैं। फिर इसी शक्ति ने कल्पना से ये सब जीवों का विस्तार किया। सब लिखना सम्भव नहीं है। मुख्य बाते समझाने की कोशिश कर दि गयी है। अब आते आपके मुल प्रश्न पर इस कारण तत्वों से बना ये शरीर नाशवान व इसमे अपनी इच्छा से विराजमान आत्मा ही जीव बना हुआ है भुले से मन को पावर देकर। यही आत्मा अजर अमर है मन तो आत्मा से पावर लेकर जिवित बना हुआ है। यही सुक्ष्म मन इच्छा से चाहत व मोह में यात्रा करता है ओर बार बार नये शरीर धारण करता है ओर रचना करता रहता है ओर करता रहेगा। यही जीवन मरण है। इसलिए जो इस सत्य को समझ व अच्छी तरह से परख ले ओर सब असत को अलग अलग कर दे तो शेष केवल आत्मा बचती है। ये आत्मा इसलिए कहलाती है क्योंकि ये इच्छा से इन शरीरों में कैद है। ओर ये सुरति रुप में हर शरीर में रम रही है। जिस सुरति ने इच्छा नहीं की वो मुल सुरति परमात्मा है। जो समय समय पर बिना गर्भ के शरीर धारण करके सत आत्मज्ञान देकर सहशरीर वापिस लीन हो जाती है। जैसे कलयुग में सतं कबीर साहब। सतयुग में मुनीन्द्र साहिब आदि। इसलिए ये मुल ज्ञान वेदों या कहीं भी नहीं है। इसे ही गुप्त मुल ज्ञान कहा है। क्योंकि इसे मुल सुरति के बिना कोई समझा ही नहीं सकता। ओर इस भक्ति की विधि शब्द सतगुरु सतं ही समझा सकता है। केवल वही सतं मोक्ष की विधि बता सकता है। आगे मै नही जानता। हर पवित्र ग्रंथ में इस भेद को समझने व भग्ति की विधि समझने के लिए किसी बाखबर यानी सतं की ओर जाकर आदरपूर्वक आग्रह करके समझने को कहा है। तभी मोक्ष सम्भव है। अन्यथा नहीं। ज्यादा जानकारी के लिए फोलो करे ।नमस्कार

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