टीगार्डन का तारा (Teegarden‘s Star) क्या है? इस तारे के सौर मंडल में कितने ग्रह हैं और उनकी विशेषताएं क्या है?

टीगार्डन का तारा , तारा है तो समझ ही गए होंगे आप किसी सूरज जैसे तारे कि बात हो रही है। लेकिन टी गार्डन जैसा अजीब नाम क्यों?

दरअसल जिस वैज्ञानिक ने इसकी खोज की थी उनका नाम टीगार्डन (Teegarden) था तो उनके ही नाम पर इसका नाम टीगार्डन रख दिया गया। टीगार्डन के तारे की खोज 2003 में हो गई थी। यह एक M- टाइप रेड डवार्फ है।

इसका द्रव्यमान अपने सूर्य का 0.08 गुना है। इसके खोज में इतना देर लगने की एक ही वजह है और वो है कि यह भले ही सूरज से भारी हो लेकिन इसकी चमक और तापमान सूरज से बहुत कम है।

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यह तारा अपने सौर मंडल के तीसरा सबसे नजदीक सौर मंडल है। इसकी दूरी अपने सौर मंडल से लगभग 7.5 प्रकाश वर्ष है।

टीगार्डन तारे का सौर मंडल

टीगार्डन ग्रहों पर सूर्यास्त का नजारा, जो कि बिल्कुल पृथ्वी जैसा है।

इस तारे के सौर मंडल में सिर्फ 2 ही ग्रह हैं।

  1. टीगार्डन B
  2. टीगार्डन C

और इसकी खोज अभी अभी जून 2019 में हुई है। कलार अल्टो ऑब्जर्वेटरी ने धरती जैसे 2 ग्रहों की खोज की घोषणा की है। जो टीगार्डन तारे की परिक्रमा कर रहे हैं और यह जीवों के रहने योग्य हो सकते हैं। टी गार्डन B रहने योग्य क्षेत्र में आता है जो की हमारे सौर मंडल की तुलना में पृथ्वी और शुक्र ग्रहों के बीच में होगा। जबकि टी गार्डन C का वायुमंडल लगभग मंगल ग्रह जैसा है।

इन दोनों ग्रहों का द्रव्यमान धरती के लगभग 1.1 गुना है, जो कि अब तक ढूंढे गए ग्रहों में सबसे कम है। इन्हे वॉबल मेथड से खोजा गया है। वैसे तो इनके द्रव्यमान धरती के लगभग समान है, लेकिन इनकी विशेषताएं अभी तक पता नहीं चल पाए हैं।

इन ग्रहों की इनके तारे से दूरी बहुत कम है, इसके बावजूद भी यह रहने लायक है क्यूंकि टी गार्डन का तारा सूरज कि अपेक्षा बहुत ही कम तापमान पर जल रहा है।

ग्रह B अपने तारे की परिक्रमा सिर्फ 5 दिनों में पूरी कर लेती है। इसका मतलब है कि इस ग्रह पर एक वर्ष सिर्फ 5 दिनों का ही होता है। जबकि ग्रह C पर एक वर्ष 11.5 दिनों का होता है। इसका मतलब है कि ये ग्रह जीवन के लिए सबसे ज्यादा बेहतर स्थिति में है जहां पानी के स्रोत पाए जा सकते हैं।

कुछ सवाल क्या हैं जिनका विज्ञान जवाब नहीं दे सकता है?

1. पृथ्वी का वजन कितना है?

2. बिग बैंग से पहले क्या अस्तित्व में था?

3. आकाश का रंग क्या है?

4. बर्फ मै फिसलन क्यों होती है?

5. साइकिल कैसे काम करती है?

6. क्यों मानव को सपने आते हैं?

7.क्या परग्रही असल मैं होते है?

8.आसमान का कुल वजन कितना है?

9.पानी का सही स्वाद क्या है?

10.मनुष्य क्यों मरता है?

ऐसे ही कई सवाल आपको मिल जायेंगे जिसका जवाब आज तक विज्ञानं सही से नही दे पाया है और इन जवाबो की खोज मे लगा है।

176 सालो से एक व्यक्ति का सर बोतल में बंद कर के क्यों रखा गया है?

एक आदमी का कटा सर पिछले 176 सालो से बोतल में बंद है जी हा आप को भी सुन कर हैरानी होंगी लेकिन यह पूरी तरह से सच है पुर्तगाल विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला diago alves नाम के एक व्यक्ति का सर पिछले 176 सालो से बोतल में केमिकल के साथ संभाल कर रखा गया है |

Diago Alves का जन्म 1810 में हुआ था | वह मूल रूप से तो स्पेन का रहने वाला था लेकिन नौकरी की तलाश में वह पुर्तगाल के एक शहर में आया था लेकिन नौकरी न मिलने और बेरोज़गारी से परेशान हो कर Diago ने अपराध की दुनिया में कदम रख दिया | इसके बाद से Diago ऐसा खूंखार अपराधी बना की उसने कई लोगो को लूटपाट कर मौत के घाट उतार दिया | Diago एक सीरियल किलर बन गया | उसके सीकार ज्यादा तर किसान हुआ करते थे किसान अपना सामान बेच कर ज़ब शाम को अपने घर की ओर आते थे तब Diago उन्हें रास्ते में ही लूट लेता था और उन्हें मार देता था और उनकी लास नदी में फेक देता था | जब किसानो के गायब होने की संख्या बढ़ने लगी तो पुलिस ने जांच सुरु कर दी | पुलिस ने जांच में पाया की कोई सीरियल किलर किसानो की हत्या कर उनकी लास को नदी में फेक दे रहा है पुलिस ने ज़ब हत्यारे की तलाश सुरु की तब Diago हरकत में आ गया Diago अब समझ चूका था की पुलिस अब उसके पास कभी भी आ सकती है |

ऐसे में Diago करीब तीन साल के लिए अंडर ग्राऊंड हो गया | तीन साल बाद ज़ब मामला थोड़ा ठंडा पड़ा तो Diago ने फिर से लूटपाट और हत्या सुरु कर दिया लेकिन इस बार एक गलती कर दी | उसने एक डॉक्टर का हत्या कर दिया और पुलिस के हाथ लग गया | पुलिस उसे अरेस्ट कर लिया और कोर्ट ने उसे फाँसी की सजा दे दी ! उन दिनों Diago काफ़ी चर्चा में था इस लिए कुछ साइंटिस्ट ने कोर्ट से अपील की ! की उन्हें Diago का सर काट कर दे दिया जाये ताकि वे उसके ब्रेन पर कुछ रिसर्च कर सके और पता कर सके की Diago इतना क्रूर क्यों था | इस बात पर कोर्ट ने Diago का सर साइंटिस्ट को कटवा कर दे दिया जो की आज भी University of Lisbon में रखा हुआ है |

RAM और ROM में क्या अंतर है?

RAM (रैंडम एक्सेस मेमोरी) और ROM (read only memory) दोनों एक कंप्यूटर सिस्टम की प्राथमिक मेमोरी हैं। हालांकि वे दोनों मेमोरी हैं, वे एक-दूसरे से अलग-अलग तरीकों से अलग हैं जैसे कि कीमत, फ़ंक्शन, आकार, गति आदि। रैम और रोम के बीच अंतर करने से पहले, आइए जानें कि वे वास्तव में क्या हैं।

RAM

RAM एक प्राथमिक मेमोरी है जो वर्तमान में CPU द्वारा प्रोग्राम या फ़ाइलों को स्टोर करता है। सीपीयू रैम मेमोरी से डेटा पढ़ सकता है और डेटा लिख ​​सकता है इसलिए इसे रीड एंड राइट मेमोरी भी कहा जाता है।

सभी फ़ाइलों और कार्यक्रमों को स्थायी रूप से हार्ड डिस्क, सीडी-डीवीडी, फ्लॉपी डिस्क आदि जैसे द्वितीयक भंडारण उपकरणों में संग्रहीत किया जाता है, क्योंकि सीपीयू माध्यमिक भंडारण में संग्रहीत संसाधनों तक सीधे पहुंचने में सक्षम नहीं है, इसलिए प्रोग्राम को प्रसंस्करण के लिए रैम में लाया जाता है।

इस प्रक्रिया को प्रोग्राम “लोडिंग” कहा जाता है। जब आप एक मूवी देखने के लिए एक पत्र या निबंध लिखने के लिए एक वर्ड प्रोसेसिंग सॉफ्टवेयर चलाते हैं, या एक वीएलसी मीडिया प्लेयर, वीएलसी और एमएस वर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे प्रोग्राम उन कार्यक्रमों को रैम में लोड करते हैं और फिर सीपीयू इसे निष्पादित करता है।

RAM एक अस्थिर मेमोरी या एक अस्थायी मेमोरी है। इस मेमोरी पर लोड किया गया प्रोग्राम डेटा तब तक रहता है जब तक कंप्यूटर चालू रहता है।

एक बार जब कंप्यूटर सभी प्रोग्राम बंद कर दिया जाता है और फाइलें मिट जाती हैं। जब RAM में लोड किया गया प्रोग्राम बंद हो जाता है, तो प्रोग्राम मिटा दिया जाता है, लेकिन प्रोग्राम डेटा अभी भी हो सकता है ताकि CPU हार्ड डिस्क से आवश्यक डेटा को फिर से पढ़ने के लिए विचार करे।

यह अक्सर उपयोग किए जाने वाले डेटा को संग्रहीत करता है। कंप्यूटर का ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोग्राम को लोड करने और मिटाने के लिए जिम्मेदार है।

रैम मेमोरी आमतौर पर हार्ड डिस्क या किसी अन्य सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस से तेज होती है।

RAM के प्रकार:

SRAM

यह स्टैटिक रैंडम एक्सेस मेमोरी के लिए है। यह DRAM की तुलना में अधिक तेज़ और महंगी है।

DRAM

DRAM का मतलब है डायनेमिक रैंडम एक्सेस मेमोरी। यह SRAM से सस्ता है। अधिकांश कंप्यूटर इस प्रकार की रैम का उपयोग करते हैं।

Read Only Memory(ROM)

ROM का मतलब रीड ओनली मेमोरी है। ROM को केवल मेमोरी पढ़ा जाता है। सीपीयू इस मेमोरी से निर्देश पढ़ सकता है लेकिन यह रोम में डेटा नहीं लिख सकता है।

ROM विभिन्न महत्वपूर्ण निर्देशों को संग्रहीत करता है जो कंप्यूटर को बूट करने के लिए आवश्यक हैं, जैसे BIOS (बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम)।

ROM एक गैर-वाष्पशील मेमोरी है। कंप्यूटर बंद होने पर भी ROM का निर्देश मिटता नहीं है। ROM का उपयोग कंप्यूटरों के साथ-साथ अन्य बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसे वाशिंग मशीन, कुछ डिजिटल घड़ियों, रोबोटों आदि में किया जाता है।

Difference between RAM and ROM.

भारत का सबसे पहला कंप्यूटर किस शहर में लाया गया था और किसने लाया था?

कंप्यूटर का अविष्कार तो बहुत पहले हुआ था, लेकिन कुछ ही देशो में इनका प्रचलन था जो टेक्नोलॉजी में आगे थे लेकिन कुछ देश तो ऐसे थे जिनको कंप्यूटर के बारे में पता भी नही था

लेकिन इसकी बढती जरुरतो को देख के यह धीरे धीरे पुरे विश्व में इस्तेमाल होने लगा लेकिन इसको कुछ ही देश बनाते थे वहा से इसको लाया जाता था।

और आज सायद ही कोई देश बचा है जहा कंप्यूटर का कम इस्तेमालनहीं होता है।

भारत में सबसे पहले कंप्यूटर सन, 1952 में Dr.Dwijish Dutta द्वारा कोलकाता में भारतीय विज्ञान संस्थान के अन्दर लाया गया था जो एक एनालोंग कंप्यूटर था और उसके बाद बेंगलूर में भारतीय विज्ञान संस्थान में एक एनालोग कंप्यूटर लगाया गया था।

लेकिन भारत में वास्तव में कंप्यूटर युग की शुरुआत तो हुई सन 1956 में,हुई जब कोलकाता भारतीय विज्ञान संस्थान के अन्दर डिजिटल कंप्यूटर HEC – 2M लगाया गया था।

यह भारत का पहला इलेक्ट्रोनिक कंप्यूटर था इस कंप्यूटर के आने के बाद भारत जापान के बाद एशिया का दूसरा ऐसा देश बन गया था जिसने कंप्यूटर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया था।

फिर सन 1958 में “URL” नामक का एक कंप्यूटर भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता में लगाया गया जो आकार में HEC – 2 M से भी बड़ा था इस कंप्यूटर को रूस से खरीदा गया था और सन, 1964 में इन दोनों कंप्यूटर का इस्तेमाल बंद कर दिया था।

क्योकी, उस समय IBM ने अपना पहला कंप्यूटर IBM 1401 भारतीय सांख्यिकी संस्थान कोलकाता में लगाया जो IBM 1400 सीरीज का पहला कंप्यूटर था जो एक डाटा प्रोसेसिंग सिस्टम कंप्यूटर था जिसे IBM ने सन, 1959 में बनाया था।

अभी तक जितने भी कंप्यूटर बने थे सभी दूसरे देशों से खरीदा गया था भारत में एक भी नही बना था लेकिन, सन ,1966 में भारत की दो संस्थाओं भारतीय सांख्यिकी संस्थान तथा जादवपुर यूनिवर्सिटी द्वारा मिलकर भारत के अन्दर पहला कंप्यूटर बनाया इसका नाम ISIJU रखा गया था।

क्या आप जानते हैं कि पांच तत्वों से बना हमारा शरीर नाशवान है, जबकि इसमें बसी आत्मा अविनाशी है? हमारी अविनाशी आत्मा इस नाशवान शरीर मे कैसे फंसी?

सवाल बड़ा जटिल है परतुं नामुमकिन नहीं। इसको समझने के लिए इतनी ही तेज तर्रार बुद्धि व विवेक की जरूरत पडेगी। क्योंकि ये कल्पना से भी परे की स्थिति है। पहले ये विचार करो ये 5 तत्व कैसे बने। यदि मन होगा तो कल्पना होगी क्योंकि कल्पना के बिना तो कोई खोज नहीं हो सकती। अब ये विचार करो आखिर ये मन कहां से कैसे बना। ये निराकार वाली स्थिति हो गयी अब। क्योंकि बिना किसी पावर के तो मन कल्पना नहीं कर सकता। ये प्रमाण है की मन ओर तत्व विनाशी/मृत है। फिर इनको पावर किसने क्यों कैसे दि। अब यहां कुछ नहीं है क्योंकि हमने पावर अलग कर दि हैं। हम आपके सवाल से उल्टा चलकर हल करने की कोशिश कर रहे हैं। इस सत्य को समझना बुद्धि से नहीं विवेक से समझना होगा। अब केवल पूर्ण पावर का ही क्षेत्र है जिसका कोई ना आदि हैं ना अतं है। इस अवस्था को ही हम पूर्ण परमात्मा कहते हैं। क्यो कहते हैं ओर क्युं माने इसका पुख्ता कारण है। यही अवस्था जिवित सुरति/चाह हैं अर्थात जिवित पूर्ण उर्जा। अब आप पुरी बुद्धि व विवेक लगाकर समझे सत्य ओर असत्य को।ओर अलग अलग करते जाईये सब आसानी से समझ आ जाएगा। क्योंकि इसका प्रमाण ये सब जीव व सृष्टि है। आईये अब आगे बढते हैं। सब ओर परमात्मा ही परमात्मा है ओर कुछ नहीं है यानी ना अधेंरा ना प्रकाश एकदम शांत। अब कोई सुरति/इच्छा करती है। अर्थात पावर में हलचल होती है। ये शुरूवाती इच्छा ही मन बनता कैसे समझते रहिये। यदि इच्छा ना होती तो हलचल नहीं होती ओर ये हलचल ही मन है। ओर इच्छा को पता नहीं है ये हलचल क्या है। क्योंकि उसके पास सोचने समझने के लिए कुछ भी पास नहीं है। इसलिए ये इच्छा/सुरति ना समझने के कारण मन को ही जीवित सुरति यानी स्वयं मान बैठी। कि ये मै ही हू मेरे शिवाय ओर कोई नहीं। जबकी यहां दो चीजें हो गयी है एक सुरती व दुसरी हलचल या मन। या ये समझो समय का जन्म। यही से भारी भुलभलैया शुरू होती है। क्योंकि सुरति ही भुलवश अपने को मन मान रही है। अब 2 धाराये उत्पन हो गयी एक पोजिटिव जो सुरति है ओर दुसरी मन जो नेगेटिव यानी हलचल है। अब आगे रचना के लिए दो जरुरी पावर प्रकट हो चुकी है। दोनों में विस्फोट होता है ओर सब आकाशगंगा सुर्य तारे व सब ब्रह्मांड बनते हैं। अब मन निराकार रुप में व ये उत्पन ब्रम्हांड साकार रूप में प्रकट हो चुके हैं। इसी भ्रम की स्थिति को ब्रह्म कहते हैं। यही से 5 तत्व प्रकट हुए। अब लाखों करोड़ों सुर्य चन्द्र व असंख्य लोक प्रकट हो चुके हैं परतुं जीव अभी भी नहीं है। अब इन ब्रम्हांडों को पावर देने वाले बहुत सुर्य चन्द्र स्थापित हो चुके हैं। सब तत्व अपनी अपनी गति के अतिंम बिदुं पर जाकर स्थिर हो गये ओर कुछ गति कर रहे हैं जो आज भी है ओर रहेगें। ये बनना ओर खत्म होना ओर फिर बनना यही भ्रम व ब्रह्म है। अर्थात Light is god,, god is light. या Light was god,, Light is god. फिर धीरे धीरे सुर्य चन्द्र से उर्जा लेकर तत्व बनते बिगडते गये ओर जटिल प्रक्रिया से घास फुस का निर्माण होता गया। ओर सुक्ष्म शरीर का निर्माण हुआ जो कल्पना करने के लिए उपयुक्त था। अब जो जिवित मन था उसमें विराजमान हो गया। ओर बहुत बहुत शक्तिशाली हो गया क्योंकि उसको सोचने व कुछ करने की शक्ति मिल गयी। अर्थात हर चीज का निर्माण करने वाली सुक्षम शक्ति प्रकट हो गयी। इसे आप आदिशक्ति माया भी समझ सकते हैं। फिर इसी शक्ति ने कल्पना से ये सब जीवों का विस्तार किया। सब लिखना सम्भव नहीं है। मुख्य बाते समझाने की कोशिश कर दि गयी है। अब आते आपके मुल प्रश्न पर इस कारण तत्वों से बना ये शरीर नाशवान व इसमे अपनी इच्छा से विराजमान आत्मा ही जीव बना हुआ है भुले से मन को पावर देकर। यही आत्मा अजर अमर है मन तो आत्मा से पावर लेकर जिवित बना हुआ है। यही सुक्ष्म मन इच्छा से चाहत व मोह में यात्रा करता है ओर बार बार नये शरीर धारण करता है ओर रचना करता रहता है ओर करता रहेगा। यही जीवन मरण है। इसलिए जो इस सत्य को समझ व अच्छी तरह से परख ले ओर सब असत को अलग अलग कर दे तो शेष केवल आत्मा बचती है। ये आत्मा इसलिए कहलाती है क्योंकि ये इच्छा से इन शरीरों में कैद है। ओर ये सुरति रुप में हर शरीर में रम रही है। जिस सुरति ने इच्छा नहीं की वो मुल सुरति परमात्मा है। जो समय समय पर बिना गर्भ के शरीर धारण करके सत आत्मज्ञान देकर सहशरीर वापिस लीन हो जाती है। जैसे कलयुग में सतं कबीर साहब। सतयुग में मुनीन्द्र साहिब आदि। इसलिए ये मुल ज्ञान वेदों या कहीं भी नहीं है। इसे ही गुप्त मुल ज्ञान कहा है। क्योंकि इसे मुल सुरति के बिना कोई समझा ही नहीं सकता। ओर इस भक्ति की विधि शब्द सतगुरु सतं ही समझा सकता है। केवल वही सतं मोक्ष की विधि बता सकता है। आगे मै नही जानता। हर पवित्र ग्रंथ में इस भेद को समझने व भग्ति की विधि समझने के लिए किसी बाखबर यानी सतं की ओर जाकर आदरपूर्वक आग्रह करके समझने को कहा है। तभी मोक्ष सम्भव है। अन्यथा नहीं। ज्यादा जानकारी के लिए फोलो करे ।नमस्कार

हम क्यों समय यात्रा नहीं कर सकते कारन यहाँ जाने

ध्वनि की गति तो प्रकाश की गति के सामने नगण्य की तरह है तो आप ध्वनि की गति कर के कभी भी समय को रोक नही सकते ।

अब आते है प्रकाश पर तो जी हां आप यदि आप प्रकाश की गति पा जाते है तो बिल्कुल समय आपके लिए रुक सा जाएगा,बहुत ही मज़ेदार तथ्य है ये और यकीन मानिए भौतिकी में सबसे मजेदार यही है मेरे लिए।

आप समय मे आगे पीछे जा सकते है,आप भविष्य में जा सकते है,आप सिर्फ 1 साल या और भी कम दिन प्रकाश की गति से गये तो आप जब वापस आएंगे तो देखेंगे कि समय 20–30 साल या और भी ज्यादा बित गया है आपकी उम्र उतनी ही होगी पर आपके जानने वाले कही ज्यादा उम्र के हो गये होंगे,और यकीन मानिए ऐसा हो सकता है।

पर हा रुकिए जरा ,थोड़ा और जानते है प्रकाश की गति के बारे में,तो प्रकाश की गति वैक्यूम में 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है।

वेसे देखा जाए तो ये मान 299790km/sec होता है पर हम 3 लाख मान कर चलते है या इसे हम लोग,3*10^8m/s भी कहते है।

ये मान को कम मत आकियेगा,3 लाख किलोमीटर चलना है वो भी 1 सेकंड में। मतलब की 7–8 बार पृथ्वी का चक्कर लगा लेंगे आप वो भी 1 सेकंड में।

अब आप ये पूछ सकते है कि प्रकाश में ऐसा क्या है जिससे वो इतनी गति पाता है,

तो प्रकाश में होता है फोटोन,जिसका मास(mass) नही होता ,जिसके कारण वो इतनी ज्यादा गति पा जाता है।

अब आते है कि इंसान के लिए क्यों असम्भव सा काम है ये,

चलिए मान लिया कि इंसान ने ऐसा उपकरण बना लिया जो बहुत तेज़ भागेगा, पर ध्यान रखिए जो बनेगा मशीन उसमे तो mass होगा ही ,थोड़ा सा भी mass हुआ तो वो जैसे ही प्रकाश के गति के आस पास भी पहुचेगा तो उसका द्रव्यमान एकाएक इतना ज्यादा हो जाएगा कि वो बचेगा ही नही।

समय यात्रा करना शायद ही भविष्य में हो,पर यदि इंसान इस चीज़ को जान लिया है तो मुझे लगता है कि भविष्य में ये होगा पर समय लगेगा।

समय धीमा वर्महोल से भी संभव हो सकता है

Albert Einstein ने बताया कि ज्यादा ग्रेविटी,मतलब यदि ग्रेविटी ज्यादा होगी तो समय वहां पे धीमा बीतेगा, जो कि कुछ ग्रह पर होता है।

वैसे एक बात और गैलेक्सी या कहे आकाशगंगा में प्रकाश की गति भी बहुत कम पड़ जाती है।

इसके बारे मे कभी और बात अभी के लिए।

धन्यवाद।

🙂